Category Archives: समसामयिक

गाँधी : एक पुनर्विचार

आज शहीद दिवस यानी गाँधीजी की शहादत की 58वीं पुण्य तिथि पर मेरा मन कुछ ऐसे सवालों की ओर जाता है, जो आज की नई पीढ़ी के लिए प्रासंगिक होते हुए भी अबूझ किस्म की हैं। गाँधीजी को याद करते … Continue reading

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जैसी दुनिया है, उससे बेहतर चाहिए। बेहतर दुनिया के लिए बेहतर इंसान चाहिए।

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सृजन को बनाएँ मुक्ति का माध्यम

जब प्रकृति प्रदत्त जीवन ऊर्जा किसी कुशल व्यक्ति में अनुकूल सृजनशील दिशा का संधान कर लेती है तो वह सृजनकारी बन जाती है। यदि उस सृजन में सत्य की शक्ति और सबके प्रति प्रेम का आकर्षण मौजूद हो और वह … Continue reading

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