Author Archives: Srijan Shilpi

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विश्वनाथ प्रताप सिंह की राय

पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण के संबंध में मंडल आयोग की सिफारिशों को आंशिक रूप से लागू करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बी.बी.सी. के साथ इस विषय पर एक बातचीत में अपने दृष्टिकोण को साफगोई के साथ … Continue reading

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पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण पर बहस

वर्चस्व और प्रतिरोध की पृष्ठभूमि समाज में शांति, सौहार्द और समरसता स्थापित करने के लिए समानता और स्वतंत्रता को सुनिश्चित करना अनिवार्य है। लेकिन भारतीय समाज में समानता और स्वतंत्रता कभी वास्तविकता नहीं रही। पुरातन काल से ही हमारे यहाँ … Continue reading

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नसीहतें

कोई आदमी इतना बुरा नहीं होता कि अपनी गलती का अहसास कभी कर न सके। वहम का कोई जाल इतना सघन नहीं होता कि उसको काटकर ग़लतफ़हमी दूर न की जा सके।’ कोई जख्म इतना गहरा नहीं होता कि वक्त … Continue reading

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इंतजार

कब से इंतजार कर रहा हूँ मैं कि तुम उतरो मेरे आँगन में और मेरे हाथों में हाथ डालकर मेरे साथ नाचो, गाओ, झूमो देखो, मैं कितना खुश हूँ पर खुशी को अकेले तो भोगा नहीं जा सकता तुम भी … Continue reading

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बढ़ जाओ आगे तुम

बढ़ जाओ आगे तुम मैंने राह छोड़ दी है तुम्हारे लिए नहीं, हारा नहीं हूँ मैं पर मैं तुमसे लड़ा ही कब था मैंने लड़ना-भिड़ना छोड़ दिया है तुम इसे कायरता या पलायन मानते हो तो मानते रहो पर यह … Continue reading

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चिर-प्रतीक्षित

कब से सुन रहा हूँ सुदूर से आती हुई तुम्हारे पदचापों की मधुर ध्वनि आ रहे हो तुम धीरे-धीरे हमारे बीच तुम्हारे आने की ख़बर हमें सदियों से है हम हर घड़ी तुम्हारे ही इंतजार में रहे हैं। पहुँच चुके … Continue reading

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समीक्षा: ‘शब्दभंग’ (मारीशस का हिन्दी उपन्यास)

व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार से लड़ने की आदर्शवादी चाह और साथ ही व्यक्तिगत जीवन में उन्नति के सोपान चढ़ने व अपने प्रियजनों के लिए सुख-सुविधा हासिल करने की महत्वाकांक्षा के द्वंद्व के कारण जिंदगी किस तरह बीहड़ और खतरनाक परिस्थितियों … Continue reading

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