Author Archives: Srijan Shilpi

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हिन्दी चिट्ठाकारिता के नवीन आयाम

अनौपचारिक लेखन  चिट्ठाकारी (ब्लॉगिंग) को आम तौर पर अनौपचारिक लेखन ही माना जाता है। अनौपचारिकता शायद इसकी प्रकृति में ही है। जैसा कि मार्शल मैक्लुहान ने कहा है, “माध्यम ही संदेश है”, हर माध्यम अपने द्वारा प्रसारित संदेश और पाठक, … Continue reading

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अव्यक्त ब्रह्म

प्रत्येक जीव अव्यक्त ब्रह्म है। बाह्य एवं अंत:प्रकृति को वशीभूत करके अपने इस ब्रह्मभाव को व्यक्त करना ही जीवन का चरम लक्ष्य है। कर्म, उपासना, मन:संयम अथवा ज्ञान- इनमें से एक, एक से अधिक या सभी उपायों का सहारा लेकर … Continue reading

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मौन: सत्य का द्वार

परमात्मा हमेशा मौन है। यह उसका सहज स्वभाव है। उसने कभी अपना नाम नहीं बताया। उसने कभी यह तक नहीं कहा कि उसका कोई नाम नहीं है। उसके सारे नाम ज्ञानियों और भक्तों द्वारा दिए गए नाम हैं। उसने कभी … Continue reading

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कब तक चलेगा गठबंधन की राजनीति का दौर

भारतीय जनता लंबे अरसे से राजनीति में बेहतर विकल्प के अभाव के कारण विवशता की स्थिति से गुजर रही है। उसे या तो कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को चुनना पड़ता है या भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को। लेकिन … Continue reading

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नहीं लगने देंगे सूचना के अधिकार में सेंध

फाइल पर नौकरशाहों द्वारा लिखे जाने वाले टिप्पण (नोटिंग्स) दरअसल उनकी असली ताकत हैं। हरे रंग की नोटशीट पर लिखे जाने वाले ये टिप्पण उनके विशेषाधिकार, विवेकाधिकार और निरंकुश सत्ता के मूल स्रोत हैं। अंग्रेजों द्वारा उन्नीसवीं शताब्दी में बनाया … Continue reading

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नासमझ स्वामीभक्त बंदर

राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर भारत सरकार के आदेश से इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों ने जिस प्रकार से ब्लॉगिंग की सेवा प्रदान करने वाले कुछ प्रचलित डोमेन को प्रतिबंधित किया है, वह दुर्भाग्यपूर्ण, आपत्तिजनक और संविधान-विरोधी है। सरकार के नासमझी … Continue reading

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क्या करें ?

कुछ वर्ष पहले मैंने क्या करें (What to do) नामक एक उपन्यास पढ़ा था, जिसके लेखक मशहूर रूसी लेखक निकोलाई चेर्नीशेव्स्की हैं। यह दुनिया की कुछ चुनिंदा किताबों में से है। यह लेनिन और महात्मा गाँधी की सबसे प्रिय किताबों … Continue reading

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