Author Archives: Srijan Shilpi

About Srijan Shilpi

Your friend, philosopher & guide

आत्म-सुधार की कसरतें और चिट्ठाकारी

हमारी सोच-समझ और हमारे कर्म-व्यवहार के बीच कितनी एकरूपता है, इसी से निर्धारित होता है कि हमारा आत्म-विकास किस स्तर तक हो पाया है। ज्ञान को कर्म में परिणत कर पाना अक्सर हमसे मुमकिन नहीं हो पाता। किसी का श्रेष्ठ विद्वान, … Continue reading

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सृजन शिल्पी का स्थायी जालस्थल

मित्रो, इस पत्रकार-लेखक ने जब तीन वर्ष पहले अपनी ऑनलाइन सृजनशीलता के लिए सृजन शिल्पी नाम को अपनाया तभी यह डोमेन रजिस्टर करा लिया गया था। लेकिन जैसे बालक धीरे-धीरे कदमों का संतुलन बनाते हुए चलना सीखता है, मैंने भी … Continue reading

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एक थी फूलन

नियति जिंदगी में कैसे-कैसे रंग बिखर सकती है, इसे कोई नहीं जानता। फूलन भी नहीं जानती थी। पर नियति ने फूलन की जिंदगी के लिए बहुत-से रंग सजाए थे। जन्म से लेकर मरण तक फूलन का पूरा जीवन सुर्ख, चटक और … Continue reading

Posted in श्रद्धांजलि | 6 Comments

भारत में आसन्न वर्ग-संघर्ष की पृष्ठभूमि

मार्क्स ने जिस अर्थ में ‘वर्ग-संघर्ष’ की बात की थी, यह सही है कि भारत में विशुद्ध रूप से वैसे किसी वर्ग-संघर्ष की स्थिति अब तक नहीं बन पाई। लेकिन बीसवीं शताब्दी के दौरान भारतीय समाज में कई स्तरों पर … Continue reading

Posted in विश्लेषण | 8 Comments

सूचना को छिपाने के नौकरशाही के हथकंडे

संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार ने नौकरशाही के दबाव के सामने झुकते हुए सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 में संशोधन करके फाइल नोटिंग्स को सूचना के दायरे से बाहर निकालने की विफल चेष्टा की। यदि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 2 … Continue reading

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ऑनलाइन हिन्दी और चिट्ठाकारिता

ऑनलाइन जगत में हिन्दी  हिन्दी दुनिया की तीसरी सर्वाधिक बोली-समझी जाने वाली भाषा है। विश्व में लगभग 80 करोड़ लोग हिन्दी समझते हैं, 50 करोड़ लोग हिन्दी बोलते हैं और लगभग 35 करोड़ लोग हिन्दी लिख सकते हैं। लेकिन इंटरनेट … Continue reading

Posted in चिट्ठाकारिता | 16 Comments

हिंदी चिट्ठाकारिता के नए दौर का आग़ाज़

इंतजार के पल आज का दिन यूँ तो मित्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है और दुनिया में पहली बार अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराए जाने की लोमहर्षक घटना के लिए याद किया जाता है, लेकिन मेरे जैसे चिट्ठाकार के लिए तो … Continue reading

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