Srijan Shilpi

नहीं लगने देंगे सूचना के अधिकार में सेंध

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फाइल पर नौकरशाहों द्वारा लिखे जाने वाले टिप्पण (नोटिंग्स) दरअसल उनकी असली ताकत हैं। हरे रंग की नोटशीट पर लिखे जाने वाले ये टिप्पण उनके विशेषाधिकार, विवेकाधिकार और निरंकुश सत्ता के मूल स्रोत हैं। अंग्रेजों द्वारा उन्नीसवीं शताब्दी में बनाया गया शासकीय गोपनीयता अधिनियम आज भी सरकारी अधिकारियों के मनमानेपन की वैधता का दस्तावेज बना हुआ है। हरे रंग की नोटशीट पर सरकारी अधिकारियों द्वारा लिखे जाने वाले टिप्पण गोपनीय श्रेणी में आते थे। लेकिन सूचना का अधिकार अधिनियम के द्वारा आम जनता को फाइल नोटिंग्स को देख सकने का अधिकार मिल जाने के बाद नौकरशाहों की नींद हराम हो गई थी। इसलिए शीर्ष पदों पर बैठे तमाम नौकरशाहों ने एक सुर में सरकार पर दबाव बनाया कि फाइल नोटिंग्स को सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर रखा जाए। सरकार ने इस दबाव के सामने घुटने टेक दिए। ये राजनेता और नौकरशाह कभी नहीं चाहते कि आम जनता के हाथ में ताकत आए। सूचना के अधिकार के दायरे से फाइल नोटिंग्स को बाहर रखने संबंधी मंत्रिमंडल के निर्णय को यदि संसद का अनुमोदन हासिल हो गया तो फिर सूचना का अधिकार कानून बेमानी होकर रह जाएगा। ये नौकरशाह गोलमोल बातें बनाकर सच को छिपाने की कला में माहिर हैं। वे नहीं चाहते कि फाइल पर उनके द्वारा लिए गए किसी निर्णय के पीछे वास्तविक कारणों को पारदर्शी बनाया जाए और किसी पक्षपात या चूक के लिए अधिकारियों की जवाबदेही को सुनिश्चित किया जाए। जो लोग सूचना के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की कीमत समझते हैं उन्हें सरकार और नौकरशाहों के मंसूबों को विफल करने के लिए तुरंत रणनीतिक उपाय करने चाहिए। सूचना का अधिकार हमारे लोकतंत्र की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है और यह अधिकार हमें लंबे संघर्ष के बाद हासिल हुआ है। आम जनता और प्रेस एवं मीडिया को हर संभव कोशिश करनी चाहिए और भरपूर दबाव बनाना चाहिए ताकि संसद में सूचना का अधिकार अधिनियम में संशोधन पारित नहीं हो सके।

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