Srijan Shilpi

नासमझ स्वामीभक्त बंदर

Advertisements

राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर भारत सरकार के आदेश से इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों ने जिस प्रकार से ब्लॉगिंग की सेवा प्रदान करने वाले कुछ प्रचलित डोमेन को प्रतिबंधित किया है, वह दुर्भाग्यपूर्ण, आपत्तिजनक और संविधान-विरोधी है। सरकार के नासमझी भरे इस कदम से लाखों ब्लॉगरों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है। मुझे बचपन में पढ़ी हुई वह लघुकथा याद आती है जिसमें एक नासमझ स्वामीभक्त बंदर ने स्वामी की नींद में खलल डालने वाली मक्खी को मारने के लिए तलवार का प्रयोग किया। परिणाम यह हुआ कि मक्खी तो उड़ गई लेकिन उसका स्वामी मारा गया। भारत सरकार के संबंधित अधिकारी उसी नासमझ स्वामीभक्त बंदर के चरित्र को चरितार्थ कर रहे हैं और अपने स्वामी अर्थात् जनता की आवाज को बंद करने की मूर्खतापूर्ण कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उनके इरादे सफल नहीं होंगे। यदि प्रेस और मीडिया के विरोध के बावजूद वह अपना कदम अविलंब वापस नहीं लेती तो उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर करनी पड़ेगी।

Advertisements