मित्रो, इस पत्रकार-लेखक ने जब तीन वर्ष पहले अपनी ऑनलाइन सृजनशीलता के लिए सृजन शिल्पी नाम को अपनाया तभी यह डोमेन रजिस्टर करा लिया गया था। लेकिन जैसे बालक धीरे-धीरे कदमों का संतुलन बनाते हुए चलना सीखता है, मैंने भी धीरे-धीरे ही ऑनलाइन जगत में कदम बढ़ाए। जियोसिटीज पर अपना पहला जाल पृष्ठ अंग्रेजी में बनाया, फिर याहू पर भी बनाकर देखा, लेकिन सर्वज्ञ पर ब्लॉगिंग के बारे में पढ़कर ब्लॉगस्पॉट पर चिट्ठा बनाने की प्रेरणा मिली। यहीं से सही अर्थों में नियमित चिट्ठाकारी की लत लगी। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं, ब्लॉगस्पॉट पर कुछ समय के लिए सरकारी पाबंदी लगने के बाद मजबूरन यहाँ वर्डप्रेस पर आना पड़ा। यहाँ भी कुछ दिक्कतें महसूस हो रही थीं तो हमने नारद जी की सहायता से चिट्ठे को अपने रजिस्टर्ड डोमेन के सर्वर पर स्थानांतरित कर लिया। अब से सृजन शिल्पी के विचारों को आप स्थायी रूप से मेरे स्थायी वेब पते पर पढ़ सकेंगे। हालाँकि पिछले चिट्ठे भी जरूरत पड़ने पर विकल्प के रूप में काम आने के लिए अस्तित्व में बने रहेंगे।
सृजन शिल्पी का स्थायी जालस्थल
August 29, 2006 by सृजन शिल्पी
Posted in निजी डायरी | 2 Comments
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सत्यम् शिवम् सुन्दरम्
जैसी दुनिया है उससे बेहतर चाहिए। बेहतर दुनिया के लिए बेहतर इंसान चाहिए।Help for Hindi
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प्रिय मित्र
आपके चिट्ठे से पता चला कि ब्लॉग पर कोई प्रतिबंध भी लगा था। कृपया बताएं कि वह क्या था। मैं तो इस इलाके का नया नागरिक हूं। इसलिए तकनिकी और कानूनी सूचनाओं से ज्यादा रू ब रू नहीं हूं। सूचित करेंगे तो खुशी होगी।
शुभकामनाओं सहित
लालबहादुर
lalbahadur9@yahoo.com
आप के इस एक प्रेरणादायी लेख में मुझे गीता में कर्म पर दिया गया ज्ञान, रामायण में पर उपदेश कुशल बहुतेरे वाली बात, ओशो द्वारा मेडिटेशन पर लिखे गए लेख, महर्षि महेश योगी की ध्यान विधि सब मिले। नियमित दिनचर्या का पथ तथा छोटे-छोटे काम को महत्व देना, सब पढने को मिला। अब प्रतिदिन आपका एक लेख नियमित रूप से सुंदर काण्ड की तरह पढ़ कर उस पर मनन किया करूंगा।