राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर भारत सरकार के आदेश से इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों ने जिस प्रकार से ब्लॉगिंग की सेवा प्रदान करने वाले कुछ प्रचलित डोमेन को प्रतिबंधित किया है, वह दुर्भाग्यपूर्ण, आपत्तिजनक और संविधान-विरोधी है। सरकार के नासमझी भरे इस कदम से लाखों ब्लॉगरों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है। मुझे बचपन में पढ़ी हुई वह लघुकथा याद आती है जिसमें एक नासमझ स्वामीभक्त बंदर ने स्वामी की नींद में खलल डालने वाली मक्खी को मारने के लिए तलवार का प्रयोग किया। परिणाम यह हुआ कि मक्खी तो उड़ गई लेकिन उसका स्वामी मारा गया। भारत सरकार के संबंधित अधिकारी उसी नासमझ स्वामीभक्त बंदर के चरित्र को चरितार्थ कर रहे हैं और अपने स्वामी अर्थात् जनता की आवाज को बंद करने की मूर्खतापूर्ण कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उनके इरादे सफल नहीं होंगे। यदि प्रेस और मीडिया के विरोध के बावजूद वह अपना कदम अविलंब वापस नहीं लेती तो उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर करनी पड़ेगी।
नासमझ स्वामीभक्त बंदर
July 18, 2006 by सृजन शिल्पी
Posted in समसामयिक | 4 Comments
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सत्यम् शिवम् सुन्दरम्
जैसी दुनिया है उससे बेहतर चाहिए। बेहतर दुनिया के लिए बेहतर इंसान चाहिए।Help for Hindi
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[...] [कुछ साथियों के हवाले से पता चला कि कुछ साइटें बैन हो गयी हैं। पता नहीं यह कितना सच है लेकिन लोगों ने सरकार को कोसना शुरू कर दिया। अरे भाई,सरकार तो जो देश हित में ठीक लगेगा वही करेगी न! पता नहीं मेरी इस बात से आप कितना सहमत हैं लेकिन यह है सही बात कि सरकार हमेशा देश हित के लिये सोचती है। मैं शायद ठीक से अपनी बात न समझा सकूँ लेकिन मेरे पसंदीदा लेखक ,व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई ने इसे अपने एक लेख उखड़े खम्भे में बखूबी बताया है। [...]
[...] जैसी कि खबर मिली है कि कुछ साथियों को अपने ब्लाग पोस्ट करने में असुविधा हो रही है। कारण जो भी हो लेकिन फिलहाल अड़चन है। आलोक ने कुछ वैकल्पिकसुझाव दिये हैं। जीतू ने भी बताया है। ये दोनों तकनीकी महारथी हैं। मैं अपने जैसे तकनीकी रूप से सामान्य साथियों को सुझाव देता हूँ कि अपना लिखना स्थगित न करें। यहाँ चौपाल पर लिखते रहें। जिन लोगों के पास अक्षरग्राम का पासवर्ड नहीं है वे चौपाल के सरपंच पंकज जी से अनुरोध करें। अगर पंकज को कुछ तकनीकी समस्या है ,एक सीमा से अधिक लोगों को अनुमति न दे पाने की,तो आगे मेरा यह सुझाव है कि साथी लोग अपनी पोस्ट मेरे पास भेजें anupkidak at gmail dot com पर मैं उसे अक्षरग्राम पर पोस्ट कर दूंगा। जब उनके ब्लाग की सेवायें बहाल हो जायें तो वे अपने-अपने ब्लाग पर लिखने लगें। वैसे भी चौपाल का महत्व परेशानी आने पर ही पता चलता है। मेरे अलावा दूसरे साथी भी इस पोस्टिंग यज्ञ में हाथ बँटा सकते हैं। तो शुरू करिये न पोस्ट करना,मेल भेजना! [...]
सृजनशिल्पी जी वर्डप्रेस पर स्थानान्तरित होने के लिये बहुत बहुत बधाई।
अब ब्लॉग की थीम बहुत सुन्दर दिख रही है।
जब कुछ करने को समझ नहीं आया तो यही करना था| कहते हैं ना “खिसियानी बिल्ली खंम्बा नोंचे”